कफस समीक्षा: इलेक्ट्रोनिक राइटिंग, अच्छे अभिनय और सही-गलत का ‘कफस’, परिवार के साथ देखें ये सीरीज

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वेब श्रृंखला: कफस

निर्देशित: साहिल संघ

प्रमुख स्टारकास्ट: मोना सिंह, शर्मन जोशी, विवान भटेना, मुकेश छाबड़ा, मिखाइल गांधी समेत अन्य

कहाँ देखें: सोनी लिव

क्या है कहानी: सोनी लिव की वेब सीरीज कफस की कहानी सीमा वशिष्ट (मोना सिंह), राघव वशिष्ट (शरमन जोशी) और सनी वशिष्ट (मिखाइल गांधी) के पोर्टफोलियो- गिर घूमती है। राघव की सीमा संग दूसरी शादी है और इसी तरह की सीमा खुद अपने अभिनय के सपने पूरे नहीं कर सकीं तो वो सपने बेटे सनी से पूरे करवाती हैं। सनी को बड़े अभिनेता विक्रम बजाज (विवान भटेना) संग फिल्म मिल जाती है, लेकिन शूटिंग के दौरान ही विक्रम उनका शोषण भी करता है, जिसका सनी ने वीडियो बनाया है। फिल्म ख़त्म हो गई है और आख़िरकार सनी ने ये अपने माँ-बाप से बात की है। इसके बाद शुरू होती है असली कहानी कि आखिर एक मिडिल क्लास परिवार में ऐसे हालात क्या हो सकते हैं? क्या सच है जीत के लिए रुतबे में बेहद बड़ी इंसान जंग लड़की जाए या फिर मामला ऐसे ही खत्म कर दिया जाए? कैसे सीमा और राघव वो हर काम करते हैं, जो भी वो सोच सकते हैं? फाइनल सनी को लॉटरी में सबसे बड़ा फायदा होता है? इन सभी सवालों के जवाब के लिए आपको ये सीरीज देखनी होगी।

क्या कुछ है खास और कहां है माजरा: इस वेब सीरीज की सबसे मजबूत बात इसकी राइटिंग है और इस सीरीज के हर किरदार की कहानी में हिस्सों के अनुसार बराबर की तवज्जो मिली है। जैसे हकीकत में होता है कि हर कोई अपने खाते से और खुद के लिए सही होता है, सही निर्णय लेता है। यही बात आपको इस सीरीज में देखने को मिलेगी, जो इसका असली रूप है। किसी भी किरदार का कोई भी एक्शन, ड्राइंग सही हो या गलत, लेकिन उसका लॉजिक अकाउंट सबसे अच्छा होता है। प्रोजेक्टी के शूट सीरीज़ की एडिटिंग दमदार है और एक भी सीन या शो का हिस्सा नहीं दिखता, कहानी जिसे आगे बढ़ाने में रोबोट पैदा हो। इसके साथ ही इसका कैमरा वर्कशॉप भी ठीक है। बाकी ऐसा नहीं है कि सीरीज में सब कुछ अच्छा है, सीरीज के शुरुआती वक्त में जहां काफी साधी हुई है तो पिछले दो एपिसोड में ऐसा लग रहा है कि बस फटाफट कहानी खत्म हो रही है। सीरीज में कुछ सीन्स ऐसे थे, जो रियल फील नहीं देते। फ़्राईड फिर वो वकील के साथ बातचीत का घूंट हो या फिर कोर्ट-कचहरी।

निर्देशक और अभिनेत्री कैसा है: कफस द्वारा निर्देशित अच्छा है और साहिल संघा ने शानदार काम किया है। अभिनय की बात करें तो शरमन जोशी ने एक बार फिर से बेहतरीन अदाकारी का परिचय लिया है, लेकिन कई बार, कुछ सीन्स में काफी मिलते-जुलते हैं, यानि कि उस सीन में जो सुख-दुख होना चाहिए, वो गायब दिखता है। मोना सिंह की तो वो मां के किरदार में जान की बात करती हैं। हर एक इमोशन के साथ मोना ने अच्छा प्ले किया है। वहीं मिखाइल गांधी भी अपने किरदार के साथ स्पाइडरमैन और लाइम लाइट लूट लेते हैं। इस वेब सीरीज में मुकेश छाबड़ा का काम भी काबिल-ए-तारीफ है और पत्रकारों के किरदारों में जो अभिनय करना चाहिए, वो उनके किरदारों में दिखते हैं। वहीं विवान भटेना, तेज सिंह अहलावत, जिना वाहब, प्रीति झिंगयानी समेत अन्य कलाकार भी अच्छे परफॉर्म करते हैं।

देखें या नहीं: सोनी लिव की वेब सीरीज कफ्स आपको जरूर देखनी चाहिए। बल्कि यह सीरीज अकेले नहीं अपने परिवार के साथ देखें। इस सीरीज में ऐसी कई छोटी-छोटी बातें हैं, जो जिंदगी और उसके लिए आपको आपके अनुरोध पर मजबूर करती हैं।

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